चंडीगढ़. हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी भर्तियों पर एक साल तक रोक लगाने के फैसले की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कड़े शब्दों में आलोचना की है। हुड्डा ने कहा कि युवा पिछले काफी समय से लगातार पूरे देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की मार झेल रहा है। कोरोना महामारी से पहले ही प्रदेश में बेरोज़गारी का आंकड़ा 28 फ़ीसदी की उच्च दर तक पहुंच चुका था। कोरोना के बाद ये आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में अगर सरकारी भर्तियां भी बंद हो गई, तो प्रदेश के युवा को रोजगार कैसे मिलेगा?

भर्तियां नहीं तो HSSC और HPSC चेयरमैन कौ सैलरी क्यों

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा का कहना है कि मौजूदा मुश्किल हालातों से उबरने के लिए युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की जरूरत है। लेकिन, सरकार इसके उलट फैसले ले रही है, जो बहुत ही हैरान करने वाले हैं। ऐसा फैसला लेने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि जो युवा भर्ती के इंतजार में कई महीनों से तैयारी कर रहे हैं। यदि साल भर तक कोई काम ही नहीं करना है तो इस दौरान एचएसएससी और एचपीएससी के चेयरमैन और मेंबर्स को किसी तरह का वेतन या भत्ते देने का भी कोई औचित्य नहीं है।

हुड्डा ने कहा कि कोरोना के मुश्किल दौर में सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनके वेतन और भत्तों में कटौती के बावजूद वो अपना फर्ज निभा रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वो कर्मचारियों का हौसला बढ़ाए और विभिन्न सरकारी महकमों में बढ़ते जा रहे बैकलॉग को जल्दी से जल्दी भरे। जिन भर्तियों की प्रक्रिया जारी है, उन्हें जल्दी पूरा किया जाय।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *