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Indo-China Border: चीन सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से देश की ताकत और बढ़ने जा रही है। 14 साल के प्रयास के बाद गर्बाधार-लिपुलेख तक बनी सीमांत की पहली सड़क को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को समर्पित किया। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुए इस उद्घाटन समारोह में कैलास मानसरोवर तक बनीं इस लिंक का शुभारंभ किया। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद भी मौजूद रहे।

3 से 4 घंटे में चीन सीमा पर पहुंच पाएगी भारतिय सेना

आपको बता दें कि ये सड़क बनने से हमारी सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान साजो-सामान के साथ चीन बॉर्डर तक 3 दिन के बजाए अब तीन से चार घंटे में पहुंच जाएंगे। आईटीबीपी और एसएसबी और मजबूत होगी। उद्घाटन के साथ ही सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) व सीमा सड़क संगठन (BRO) के वाहन चीन सीमा तक पहुंचने लगेंगे। इस सड़क से कैलास मानसरोवर यात्रा, आदि कैलास यात्रा, भारत-चीन व्यापार की भी राह आसान हो जाएगी।

जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क मार्ग की दूरी 216 किमी है। मुख्यालय से गर्बाधार तक सड़क पहले से थी लेकिन गर्बाधार से चीन सीमा पर अंतिम भारतीय पड़ाव लिपुलेख तक सड़क का अभाव हमेशा खलता रहा। बीआरओ ने इसी 76 किमी लंबी दुरुह सड़क का निर्माण कार्य 2006 में शुरू किया था जो अब पूरा हो गया है। यह पिथौरागढ़ में चीन सीमा तक पहली सड़क है।

शुक्रवार को चीन सीमा सहित आदि कैलास के लिए सड़क का भी उद्घाटन हुआ। बीआरओ ने सीमा पर आदि कैलास तक की सड़क भी तैयार कर दी है। आदि कैलास को जाने वाली सड़क और चीन सीमा तक जाने वाली सड़क गुंजी तक एक ही है। गुंजी से आदि कैलास के लिए सड़क कुटी होते हुए जौलिगकोंग तक जाती है।

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