हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भिवानी रोड स्थित एक निजी अस्पताल पर छापेमारी की। अस्पताल चलाने वाला चिकित्स प्रैक्टिस से संबंधित डिग्री या डिप्लोमा नहीं दिखा पाया। छापामार टीम ने अस्पताल से एलोपेथिक दवाइयां, चिकित्सा उपकरण को कब्जे में लेकर अस्पताल को सील कर दिया है। हालांकि जिला ड्रग कंट्रोलर बाहर होने के कारण आगामी कार्रवाई नहीं की जा सकी। ड्रग कंट्रोलर के आने के बाद दवाइयों की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग चिकित्सक के खिलाफ आगामी कार्रवाई करेगा।

दरअसल स्वास्थ्य विभाग को शिकायत मिली थी कि भिवानी रोड बाईपास के निकट अनिल नाम का व्यक्ति गरिमा चाइल्ड एंड जरनल क्लीनिक चला रहा है। जिसके पास न कोई डिग्री है और न ही कोई डिप्लोमा है। नोडल अधिकारी डा. प्रभू दयाल के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गरिमा क्लीनिक पर छापेमारी की तो वहां पर गांव रामगढ़ की महिला उपचाराधीन पाई गई। जिसको ग्लूकोज की बोतल लगाई गई थी। जिसको तथाकथित चिकित्सक अनिल ईलाज दे रहा था। जब तथाकथित चिकित्सक अनिल से प्रेक्टिस से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो वह दिखाने में नाकाम रहा। जब छापामार टीम ने बीएएमएस चिकित्सक से संपर्क साधा तो पता चला कि नौ जून के बाद वे क्लीनिक पर नहीं आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक से एलोपेथिक दवाइयां, दस मरीजों की ओपीडी स्लीप, चिकित्सा उपकरण, क्लीनिक की लेटर पैड बरामद हुई।

अस्पताल पर पहले भी दर्ज है एक मामला

बताया गया की क्लीनिक संचालक पर वर्ष 2016 में भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया था। जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है। अस्पताल संचालक अनिल ने कैमिस्ट का कार्य भी किया था, जिसका लाइसेंस रद्द हो चुका है। इसके अलावा उसने निजी अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दी थी। जिसके बाद उसने अपना खुद का निजी क्लीनिक बना लिया। पहले क्लीनिक को चलाने के लिए बीएएमएस चिकित्सक की सेवाएं ली। उसके छोड़ जाने के बाद अब खुद क्लीनिक को चला रहा था।

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