सोनीपत के गांव आहुलाना के बीएसएफ के हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार की छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मौत हो गई थी। BSF जवान का पार्थिव शरीर लेकर एक टुकड़ी गांव पहुचीं। बताया गया था कि जवान ने आत्महत्या की है।

गांव में पार्थिव शरीर पहुंचने पर परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि सुरेश कुमार आत्महत्या नहीं कर सकता। उनकी मौत के मामले में अधिकारिक जांच होनी चाहिए और उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए व परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।

BSF जवान ने की आत्महत्या

जानकारी अनुसार गांव आहुलाना के रहने वाले सुरेश कुमार बीएसएफ की 157 बटालियन में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बतौर हेड कांस्टेबल पर तैनात थे। वह अपने दल के साथ शुक्रवार को नक्सल विरोधी अभियान के लिए गए थे। बीएसएफ की तरफ से बताया गया है कि सर्च अभियान के बाद दल के जवान जब शनिवार सुबह वापस लौट रहे थे तब अपने शिविर से लगभग दो सौ मीटर पहले सुरेश कुमार ने खुद को गोली मार ली। गोली की आवाज सुनने के बाद जब अन्य जबान उसके पास पहुंचे तो उन्हें सुरेश लहुलूहान हालत में मिला। तबतक उसकी मौत चुकी थी। इस घटना की सूचना मिलने के बाद से ही परिजन स्तब्ध थे।

शव लेकर आये बीएसएफ इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने कहा कि उन्हें पार्थिव शरीर घर पहुंचाने के लिए भेजा गया है। सुरेश की मौत के मामले में जांच जारी है। जांच के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो पाएगा।

क्या कहना है परिवार का

मृतक जवान की पत्नी का कहना था उनके पति की मौत के मामले में जांच कर उन्हें न्याय दिया जाए। उनका कहना था कि वह किसी सूरत में आत्महत्या नहीं कर सकते। उनके घर में सबकुछ ठीक है। ऐसे में सुरेश कुमार को शहीद का दर्जा दिया जाएगा। इसी मांग को लेकर परिजनों ने सुरेश कुमार के शव को लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार को सरकारी सुविधा मिले और सरकारी नौकरी भी। उसके बाद ही अंतिम संस्कार करेंगे।

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