farmers-twitter

आज भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई में ट्विटर पर किसान एक आंदोलन शुरू हुआ है। #किसान_कर्जा_मुक्ति ट्रेंड देशभर में पहले नंबर पर ट्रेंड कर रहा है। लाखों लोग इस मुहिम में भाग ले रहे है। भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक मध्यप्रदेश का किसान संघ, आम किसान यूनियन समेत कई और किसान संगठनों ट्विटर के इस आंदोलन में हिस्सा लिया है। उनका कहना है कि कोरोना संकट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए।

आपको बता दें भाकियू ने 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में 1.5 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की भी मांग की है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैट सवाल करते हैं कि अगर कार्पोरेट सेक्टर का कर्ज माफ किया जा सकता है तो किसानों का क्यों नहीं? आज शाम #ट्विटर पर किसान आंदोलन #किसान_कर्जा_मुक्ति के टैग के साथ किसान संगठनों से जुड़े लोग सरकार से सवाल सरकार से कर रहे हैं।

इससे पहले भारतीय किसान यूनिय ने 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री को खत लिखकर कर्ज माफ करने की मांग की थी। खत में कहा गया था कि लॉकडाउन के चलते किसानों का भारी नुकसान हुआ है। लॉकडाउन की घोषणा तब करनी पड़ी जब रबी एवं खरीफ की बुवाई की तैयारी चल रही थी। असमय बारिश के कारण किसानों की फसलों की कटाई 15 दिन लेट हो चुकी थी। लॉकडाउन के कारण कटाई के लिए मजदूर मिलने से लेकर जैसे-तैसे कट चुकी फसल की खरीद में भी कई तरह की मुश्किलें आ रही हैं। देश दुनिया की खबरों के लिए हमे ट्विटर पर फॉलो करें

भारतीय किसान यूनियन ने प्रधानमंत्री से की थीं यह अहम मांगें-

  • लॉकडाउन के तहत फल, सब्जी, दूध, पोल्ट्री, फिशरीज, मधुमक्खी पालक, फूल उत्पादक किसानों के नुकसान की भरपाई हेतु भारत सरकार द्वारा अविलम्ब 1.5 लाख करोड़ का पैकेज दिया जाए.
  • किसान सम्मान निधि का लाभ पहली किश्त की तरह सभी किसानों को दिया जाए.
  • किसान सम्मान निधि की राशि को 6 हजार रु. से बढ़ाकर 24 हजार रु. किया जाए.
  • किसानों की सभी तरह की फसलें कपास, गेंहू, चना, सरसों, सब्जियों की खरीद की जाए.
  • लम्बे समय से मौसम की मार झेल रहे किसानों को गेंहू पर 200 रु. कुन्तल बोनस दिया जाए.किसानों के सभी तरह के कर्ज के ब्याज पर एक साल की छूट व खरीफ की बुवाई में खाद, बीच की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
  • फल, सब्जी, फूल उत्पादक किसानों की फसली ऋण माफ किए जाएं.
  • देश में अन्न की आत्मनिर्भरता के साथ-साथ दलहन व खाद्य तेल में भी देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
  • कृषि आयात पर देश की निर्भरता को समाप्त करने हेतु खाद्य तेल व दलहन उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर उनकी फसलों की सरकारी खरीद की जाए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *