कोरोना महामारी में सरकार को एक निजी लैब पर भरोसा करना महंगा पड़ा है। दरअसल लैब द्वारा जांच में निगेटिव मरीजों को कोरोना पॉजिटिव बता दिया गया था। लैब की गलत रिपोर्ट के बाद हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम की SRL लैब के खिलाफ जांच बैठा दी है। जिन मरीजों को उक्त लैब द्वारा पॉजिटिव बताया गया था, उनकी जांच दो अन्य लैब में कराई गई तो दोनों को निगेटिव बताया है।

सरकार ने लैब को भविष्य में सैंपल देने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसकी जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला होगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विभाग के उच्च अधिकारी राजीव अरोड़ा को जांच के आदेश दिए हैं।

लैब की इस गलत रिपोर्ट का खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों पर अंबाला छावनी की एक एएनएम की जांच दूसरी लैब से कराई गई। दूसरी लैब द्वारा नर्स को निगेटिव बताने पर एक अन्य लैब से भी जांच में सामने आया कि जिस नर्स को पॉजिटिव बताया गया है, उसमें कोरोना संक्रमण है ही नहीं।

दो लैब द्वारा इस लैब की रिपोर्ट की पुष्टि होने के साथ ही पंचकूला सेक्टर- 11 के एक डॉक्टर ऋषि नागपाल से उपचार कराने वाले शहजादपुर के जिन मरीजों को इस लैब ने पॉजिटिव बताया था, उनकी रिपोर्ट भी दूसरी लैब से जांच कराने पर निगेटिव निकली है। चार मरीजों के नमूनों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज लैब और खानपुर दो लैब से चेक कराया गया। जिससे किसी तरह का संदेह न रह जाए। 

सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लैब के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह एक संगीन मामला है, इसीलिए जांच में लैब संचालक दोषी पाए गए तो बख्शा नहीं जाएगा। विज ने पंचकूला के डॉक्टर नागपाल के भी जांच में निगेटिव निकलने की बात की पुष्टि की है।

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