कोरोनावायरस महामारी का असर इस बार कांवड़ यात्रा पर भी पड़ा है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कांवड़ यात्रा पर बातचीत हुई। तीनों राज्यों ने तय किया गया कि शिवभक्तों की सुरक्षा प्राथमिकता में है। इसलिए कांवड यात्रा पर इस बार रोक रहेगी।

वहीं राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत कर सहमति ली जाएगी। इस बार शिवभक्त स्थानीय स्तर पर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जलाभिषेक कर सकते हैं।

दिल्ली, हरियाणा, यूपी आदि राज्यों से लाखों की संख्या में शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार जाते हैं। जो पैदल या अन्य संसाधनों से गंतव्य के लिए रवाना होते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर में कांवड़ संघ बड़ा आयोजन करता है। मेरठ जोन के आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि कांवड़ संगठनों ने सूचना दी थी कि इस साल कोरोना महामारी और सरकार के दिशा निर्देशों के चलते कोई यात्रा नहीं करेंगे। घर पर ही त्योहार मनाया जाएगा।

मेरठ की कांवड़ समितियों ने यात्रा नहीं निकाले जाने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस संबंध में शासन को पत्र लिखा था। यूपी और उत्तराखंड सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजी गई थी।

कांवड़ संघ और संतों ने भी कांवड़ यात्रा स्थगित का प्रस्ताव दिया था

बता दे उत्तराखंड के सीएम रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा की। रावत ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने भी कोरोना संक्रमण रोकने के लिए यात्रा पर गंभीरता से विचार करने को कहा था। उन्होंने कहा कि कांवड़ संघों और संत महात्माओं ने भी इस बार कांवड़ यात्रा स्थगित करने का प्रस्ताव दिया था। इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ कांवड़ यात्रा के संबंध में विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में तय हुआ कि कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए यह बहुत जरूरी है कि लोगों की भीड़ इकट्ठी न होने पाए। हालांकि, स्थानीय स्तर पर निर्धारित गाइडलाइंस का पालन करते हुए लोग जलाभिषेक कर सकते हैं। जल्द ही इस सबंध में राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के साथ भी चर्चा होगी।

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