बदले मौसम में बुखार भ्रमित कर रहा है। डॉक्टरों की तरफ से कई बुखार की जांच लिखी जा रही हैं। जिनमें रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। इसमें मरीजों को खर्च भी वहन करना पड़ रहा है। फिर भी परेशानी से निजात नहीं मिल रही है। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इसको लेकर सलाह दी है।
IMA ने बुखार के बढ़ते मामलों को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया है। उन्होने बताया कि यह बुखार अमूमन 3 दिन में ठीक हो रहा है लेकीन गले की समस्या को ठीक होने में 2 हफ्तों का समय लग रहा है। उन्होंने इस बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं नहीं लेने की सलाह दी है।
फिलहाल मौसम में गर्माहट बढ़ गई है। ऐसे में पीजीआई में करीब 3 हजार मरीज प्रतिदिन बुखार, खांसी, सर्दी जुकाम की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकतर को पिछले कई दिनों से परेशानी महसूस होने के बाद लक्षणों को समझ पाना आसान नहीं रह गया है।
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डॉक्टरों की तरफ से रोजाना करीब 2 हजार मरीजों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड की जांच लिखी जा रही हैं। सरकारी रिकार्ड में डेंगू, मलेरिया का कोई मरीज नवंबर माह के बाद नहीं मिला है। जबकि चिकनगुनिया का मरीज कई साल से नहीं मिला है। वैसे भी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया बरसात के दिनों में ही अधिकतर सामने आता है।
फिर भी इन बुखार की भांति फिलहाल, शरीर टूटा हुआ महसूस होना, लगातार बुखार रहना, भूख नहीं लगना, जोड़ों में दर्द महसूस होना जैसे लक्षण फिलहाल लोगों में दिखाई दे रहे हैं। इस पर डॉक्टरों की तरफ से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड की जांच लिखी जा रही है। इनमें रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। केवल टाइफाइड के ही 1-2 केस सामने आ रहे हैं।
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