पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को हरियाणा के स्कूलों में कक्षा 11वीं में विज्ञान विषय का चयन करने वाले छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए हरियाणा शिक्षा बोर्ड के आदेश पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति मंजरी नेहरू कौल की खंडपीठ ने राज्य के निजी स्कूलों के एक समूह एनआईएसए (NISA) एजुकेशन सोसायटी की याचिका पर यह आदेश दिया।

हरियाणा शिक्षा बोर्ड के आदेश को दी गई चुनौती

सोसायटी ने बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन, हरियाणा के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि 11वी में विज्ञान स्ट्रीम का विकल्प चुनने के इच्छुक छात्रों को परीक्षा देनी होगी। बोर्ड ने स्कूलों से 17 जून तक परीक्षा के लिए ऐसे छात्रों की सहमति को वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भी कहा था, जो विफल रहे कि छात्रों की रिपोर्ट / परिणाम को ‘शून्य’ माना जाएगा।

स्कूलों ने अदालत को बताया था कि सरकार का कदम भेदभावपूर्ण है। अदालत को बताया गया कि कोरोना के प्रकोप के कारण परिणाम औसत आधार पर घोषित किया जाना था, लेकिन अब अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से चार महीने बीतने के बाद सभी छात्रों को 10+1 कक्षाओं में प्रवेश मिल गया है। लेकिन बोर्ड अब परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहा है।

यह भी कहा गया कि उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने 23 जून को एक अधिसूचना जारी की थी। जिसके द्वारा कहा गया की विश्वविद्यालय और कॉलेज के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा पदोन्नत किया जाएगा। स्कूलों ने मांग की है कि स्कूली छात्रों को लिए भी इसी मानदंड को अपनाया जाना चाहिए।

अब हाईकोर्ट ने 6 जुलाई तक सरकार और बोर्ड से जवाब मांगा है। साथ ही अगली सुनवाई तक परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी है।

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