कैथल के सांघन गांव के महंत रामभज दास हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। महंत रामभज दास ने एक अन्य मंदिर के महंत राघव दास शास्त्री की हत्या की पांच लाख रुपये में सोनीपत के हिस्ट्रीशीटर गैंग को सुपारी दी थी। एडवांस पैसों पर सहमति नहीं बनी, इसलिए बदमाशों ने महंत रामभज दास को ही पीट-पीट कर मार डाला।

वहीं पुलिस ने मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हत्याकांड को सोनीपत और जींद के गिरोह ने अंजाम दिया था। एसपी शशांक कुमार ने बताया कि महंत रामभज दास एक अन्य मंदिर के महंत राघव दास शास्त्री को मारना चाहता था। उसने इसके लिए पांच लाख रुपये में सोनीपत के हिस्ट्रीशीटर गैंग को सुपारी दी थी, लेकिन सुपारी के एडवांस पैसों को लेकर गैंग व रामभज दास में सहमति नहीं बन पाई। इस पर बदमाशोंं रामभज दास को पीट-पीट कर मार डाला।

क्या कहा पुलिस ने

एसपी ने बताया कि मृतक महंत रामभज दास शहर के प्राचीन हनुमान मंदिर पर कब्ज़ा करने की साजिश रच रहा था। रामभज दास अपने साथी कुलबीर के माध्यम से बदमाश अजय मेहरा और सोनीपत के गैंगस्टरों के संपर्क में था। प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत राघव दास 92 वर्ष के हैं। रामभज दास ने उनकी हत्या की सुपारी पांच लाख रुपये में दी थी। रामभज दास की प्राचीन हनुमान मंदिर की 60- 70 करोड़ करोड़ रुपये की संपत्ति पर नजर थी।

रामभज दास ने कम आयु में ही श्रृंगी आश्रम की गद्दी संभाल ली थी। चकाचौंध ने उसका दिमाग खराब कर दिया था। वहीं मरने से पहले दिए बयान में जिस महंत छवि राम दास का नाम लिया था उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं मिला। रामभज दास छविराम दास को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता था। राघव दास के बाद गद्दी पर कहीं वह न बैठ जाए, इसलिए रामभज दास ने मरने से पहले छवि राम दास का नाम लिया था।

महंत रामभज हत्याकांड का यह था घटनाक्रम

आश्रम के 28 वर्षीय महंत रामभज दास को 24 जून की सायं बेलरखां गांव निवासी कुलबीर आश्रम से बुलाकर लेकर गया था। रामभज दास ने आश्रम से जाते समय सेवादारों से बताया था कि वह कैथल जूस पीने के लिए जा रहा है। वह जल्द ही वापस आ जाएगा, रात को करीब 11 बजे महंत पर हमले की सूचना ग्रामीणों को मिली। रामभज दास की चंडीगढ़ पीजीआइ में मौत हो गई। मौत से पहले उसने बयान दिए थे जो अब झूठ निकले है।

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