आपदा की इस स्थिति में सरकार और कोरोना योद्धा जी जान से लगे हुए है। लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल भी कर रहे हैं। ताजा मामला मानेसर का है। दरअसल मजदूरों ने मदद की गुहार लगाई और कन्ट्रोल रूम में फोन किया कि हम 100 मजदूरों ने दो दिन से खाना नहीं खाया है। किसी के पास रुपये तक नहीं हैं। प्रशासन से ही मदद की उम्मीद है। खाना भेज दीजिए।

सूचना मिलने के बाद मदद के लिए जिला प्रशासन की टीम गांव खोह पहुंच गई। लेकिन जब टीम वहां पहुँची तो नजारा कुछ और ही था। उन्होंने पाया कि मजदूरों के कमरे में अंडा करी बनी हुई थी व खाने का पर्याप्त सामान उपलब्ध था। इतना ही नहीं वे जुआ भी खेल रहे थे। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर टीम ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी। प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

मानेसर निवासी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि वह जिला प्रशासन की तरफ से जरूरतमंदों की मदद करने के लिए सिविल डिफेंस के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्हें सूचना मिली थी कि गांव खोह में 100 मजदूर हैं, जिनके पास न तो राशन है और न ही रुपये। इस पर प्रशासन की टीम मजदूरों के लिए खाना लेकर मौके पर पहुंच गई। जैसे ही मजदूर खाना लेने कमरों से बाहर आए तो टीम के कुछ सदस्य उनके कमरे में पहुंचे। जांच के दौरान पाया कि कुछ मजदूरों के कमरे पर अंडा करी के साथ रोटी बनी हुई है। आटे की कई थैलियां भी रखी हुई हैं। कुछ मजदूर कमरे में बैठे जुआ खेल रहे थे। टीम को देखते ही उन्होंने जुए की रकम को छिपाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया की ऐसे कार्यो से उनका समय व्यर्थ होता है और जरूरतमंद लोगों तक मदद भी नहीं पहुंच पाती।

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