अनाज की खरीददारी के साथ ही शुरू हुई हरियाणा में आढ़तियों की हड़ताल खत्म हो गई है। अब गेहूं खरीद सुचारु और सामान्य रूप से चले, इसके लिए हरियाणा सरकार प्रयासरत है। इसी के लिए सरकार ने अब प्रदेश की मंडियों (प्रिंसिपल यार्ड और सब यार्ड) में रोजाना फसल बेचने वाले किसानों की संख्या को बढ़ाकर अब 200 कर दी है। जबकि अभी तक ये लिमिट कुल 100 किसानों की ही थी। मगर अब 100 किसान सुबह के समय और 100 किसान दोपहर बाद अपने शेड्यूल के अनुसार मंडियों में फसल बेच सकेंगे।

इसी तरह अन्य खरीद केंद्रों में भी सुबह और दोपहर 25-25 किसान फसल बेच पाएंगे। जबकि पहले खरीद केंद्रों में पूरे दिन में सिर्फ 25 किसानों को ही फसल बेचने की अनुमति दी गई थी। हरियाणा में इस वक्त कुल 1831 मंडियों और खरीद केंद्रों में गेहूं और सरसों की खरीद का काम चल रहा है। हालांकि आढ़तियों की हड़ताल की वजह से गेहूं खरीद का काम कुछ दिन प्रभावित जरूर हुआ है। जिस वजह से गेहूं की सरकारी खरीद की रफ्तार बहुत धीमी रही। 

हालांकि गत दिवस प्रदेश सरकार इस हड़ताल को खत्म करने में कामयाब रही।अब हरियाणा के सभी मंडियों व खरीद केंद्रों में जल्द से जल्द गेहूं खरीद का काम खत्म हो, इसके लिए भी सरकार विभिन्न तैयारियों में जुट गई है। इस संदर्भ में हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने सभी मार्केट कमेटी के अधिशासी अधिकारियों एवं सचिवों को उक्त निर्देश जारी कर दिए हैं। 

किसानों अपनी इच्छा से बेच सकेंगे अनाज

सरकार ने बताया कि मंडियों और खरीद केंद्रों पर यह किसान की इच्छा पर निर्भर होगा कि वे किसके माध्यम से अपना अनाज बेचना चाहता है। कई जिलों में किसान उत्पादक संगठनों व ग्राम पंचायतों ने कच्ची आढ़त का लाइसेंस लिया हुआ है। जबकि कई जगह सरकारी एजेंसियां भी खरीद कर रही हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसान इनके माध्यम से अपनी फसल सरकार को बेचना चाहता है तो उनकी शेड्यूलिंग संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव करेंगे। जबकि वे किसान जो अपनी फसल आढ़तियों के माध्यम से ही बेचना चाहते हैं तो उनकी शेड्यूलिंग आढ़तियों के माध्यम से ही प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

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