हरियाणा सरकार पंचायतों, तहसीलों की सीमाओं को फिर से तय करने जा रही है। सरकार का दावा है की बेहतर सुविधाओं और सहूलियतों के लिए सब डिवीजन, ब्लॉक, तहसील, उपतहसील, पंचायत समिति व पंचायतों की सीमाओं जरूरत के मुताबिक नए सिरे से निर्धारण करना जरूरी है। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी भी बना दी है। कमेटी की अध्यक्षता डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला करेंगे। शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर और सहकारिता मंत्री डॉक्टर बनवारी भी कमेटी में शामिल हैं। इसे लेकर पिछले माह राजस्व विभाग के एसीएस धनपत सिंह की ओर से नोटिफिकेशन जारी हुआ था। जल्द ही पंचायत विभाग की ओर से भी नोटिफिकेशन जारी होगा, जिसके बाद कमेटी की बैठक होगी।

वही बताया गया की कमेटी चाहे तो किसी विधायक को भी इस कार्य में शामिल कर सकती है। कमेटी इन सभी के दोबारा निर्धारण संबंधी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी। कमेटी का कार्यकाल तीन माह का है, जो प्रदेश में नए सब डिवीजन, तहसील, उपतहसील, पंचायत समिति और पंचायतों का नए सिरे से निर्धारण करेगी।

हरियाणा सरकार का आदेश, प्राइवेट स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस लें, दूसरे फंड न वसूलें

हालांकि कोरोना आपतकाल की वजह से अभी कोई काम नहीं हो पाया है। जबकि कमेटी के तीन माह 10 जुलाई में पूरे हो जाएंगे। इधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि जब सब कुछ बंद है तो कमेटी 3 माह में कैसे रिपोर्ट देगी। कमेटी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यदि कोरोना की वजह से समय कम रहता है तो नोटिफिकेशन दोबारा होगा या समय आगे बढ़ाया जा सकता है।

क्यों जरूरी है सीमा निर्धारण

हरियाणा में शहरों का विस्तार हाे चुका है तो गांव कस्बों का रूप ले चुके हैं। ऐसे में कई बार ब्लॉक और तहसीलों को सबडिवीजन बनाने की मांग उठती है। मांग तार्किक और जरूरी है तो क्षेत्र के लोगों को लाभ हाेगा। ग्राम पंचायतें भी दूसरे सब डिवीजन, तहसील आदि से जुड़ना चाहती हैं, क्योंकि मुख्यालय इनके नजदीक होता है। यह कमेटी लोगों की सुविधा को लेकर काम करेगी।

ऐसे में यदि कोई सब डिवीजन बनता है तो उसके आस-पास के ग्रामीणों को वहीं पर प्रशासनिक सेवा मिलने लगेगी। छोटे-छोटे सरकारी काम यहीं पर हो सकेंगे। किसी पंचायत को पास की पंचायत समिति में शामिल होने पर पंच-सरपंचों को पंचायती कामकाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

कौनसे फैक्टर देखे जाएंगे

जिन सब डिवीजन, ब्लाॅक, तहसील या पंचायतों का दोबारा निर्धारण किया जाना है, उनकी जमीनी हकीकत परखी जाएगी। कमेटी देखेगी कि लोगों को किस प्रकार प्रशासनिक सुधार के साथ गवर्नेंस और बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं। जनसंख्या, प्रशासनिक सेवा, आर्थिक गतिविधि, भौगोलिक क्षेत्र आदि फैक्टर भी देखे जाएंगे। बाद में अपग्रेडेशन के लिए सरकार और भी पैमाने बनाएगी।

पहले भी बनी थी कमेटी, तब चरखी दादरी बना था 22वां जिला

सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में बनी कमेटी की सिफारिश पर चरखी दादरी को 22वां जिला बनाया गया था। अम्बाला कैंट, बाढ़ड़ा, बड़खल, नारनौंद, बादली, उचाना, घरौंदा, पुन्हाना और रादौर को सब-डिवीजन बनाया गया था। 2017 में तावड़ू और 2018 में लाडवा को सब-डिवीजन का दर्जा मिला था। उम्मीद की जा रही है कई और नई डिवीजन बनाई जा सकती है।

हरियाणा की ऐसी ही ताजा खबरों के लिए जुड़िए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *