कैथल : स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आज 10वीं व 12वीं के स्कूली छात्रों, जेबीटी, एएनएम, जीएनएम व होम्योपैथिक कोर्सों के विद्यार्थियों के विद्यार्थियों को प्रमोट करने और अन्य मांगों को लेकर शिक्षामंत्री हरियाणा सरकार के नाम तहसीलदार कैथल को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान एसएफआई के हरियाणा राज्य उपाध्यक्ष मनजीत सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

SFI के जिला सचिव गोलू बात्ता ने कहा कि फरवरी के महीने से ही भारत कोरोना महामारी से अपनी पूरी शक्ति से लड़ रहा है लेकिन हरियाणा की भाजपा व जजपा सरकार प्रदेशभर के विद्यार्थी समुदाय की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। पिछले दिनों एसएफआई के संघर्ष की बदौलत महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के स्नातक व परास्नातक विद्यार्थियों को तो प्रमोट कर दिया गया है लेकिन स्कूली छात्रों, जेबीटी, एएनएम, जीएनएम व होम्योपैथिक कोर्सों के विद्यार्थियों की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। क्या इन छात्रों को कोरोना वायरस नहीं होगा।

प्रदेश सरकार का यह रवैया बहुत भेदभावपूर्ण है। सरकार के इस रवैये से प्रदेशभर के विद्यार्थियों में बहुत रोष है एसएफआई छात्र संगठन हरियाणा सरकार के इस भेदभावपूर्ण रवैये का विरोध करता है और सरकार से मांग करता हैं कि विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की तरह ही स्कूली छात्रों, जेबीटी, एएनएम, जीएनएम व होम्योपैथिक कोर्सों के विद्यार्थियों को भी एवरेज मार्क्स व आंतरिक मूल्यांकन तथा 10% वेटेज के आधार पर प्रमोट किया जाए।

विद्यार्थियों की ओर ध्यान दें सरकार

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों का सिलेबस भी लॉकडाउन के कारण पूरा नही हुआ है। हालांकि सभी सरकारी व प्राइवेट शिक्षण संस्थान दावा कर रहें हैं कि लॉकडाउन के कारण रह गया सिलेबस संस्थान द्वारा ऑनलाइन माध्यम से करवाया गया है। लेकिन ऑनलाइन के माध्यम से जो सिलेबस करवाया गया वह मात्र खानापूर्ति है।

संस्थानों को यह समझना चाहिए कि वाटसएप्प पर पीडीएफ (PDF) भेज देने मात्र को ही पढ़ाई नहीं कहते हैं। और अनेकों ऐसे विद्यार्थी हैं जो ऑनलाइन क्लास ले ही नही ले पाए। अनेकों ऐसे विद्यार्थी हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लास लेने के लिए स्मार्टफोन नहीं है, स्मार्टफोन है तो नेटवर्क की समस्या है और इसके साथ साथ समय व स्थान का अभाव है जहां पर बैठकर वे पढ़ाई कर सकें। कोरोना के करोड़ो लोगों का रोजगार छिन गया जिसके कारण उनके घरों का माहौल बिगड़ गया। जिसके कारण लाखों विद्यार्थियों पर मानसिक तनाव बढ़ गया और भविष्य की चिंता ने इस तनाव ओर ज्यादा बढ़ाया है।

SFI ने सरकार से ये माँग की है

  • दसवीं और बाहरवीं की बची हुई परीक्षाओ को रद्द किया जाए।
  • विद्यार्थियों द्वारा अब तक दिए गए पेपरों के आधार पर ही रिजल्ट घोषित किया जाए।
  • जेबीटी, एएनएम, जीएनएम व होम्योपैथिक कोर्सों की परीक्षाओं को रद्द किया जाए।
  • छात्रों को एवरेज मार्क्स व आंतरिक मूल्यांकन तथा 10% वेटेज के आधार पर प्रमोट किया जाए।
  • विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा जमा करवाई जा चुकी एग्जाम फीस वापिस दी जाए।
  • प्राइवेट स्कूलों में चार महीने की फीस माफ की जाए या सरकार द्वारा भुगतान किया जाए।
  • जो विद्यार्थी हॉस्टल में रहते हैं उनके 4 महीने की एडवांस में दी गई फीस को अगले सेशन में एडजस्ट किया जाए।
  • जो विद्यार्थी डे स्कॉलर हैं जिनके बस पास बने हुए है उनके पास लिमिट को आगे बढ़ाया जाए ।
  • जब तक कोरोना वायरस के नए केस आने बंद ना हो तब तक शिक्षण संस्थानों को न खोला जाए।
  • जिन विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति नहीं दी गई है तुरंत उनकी छात्रवृत्ति जारी की जाए।
  • विद्यार्थियों द्वारा कोचिंग सेंटरों में भरी गई फीस को वापिस दिलवाया जाए।

इस मौके पर सौम्या, पुरनिमा वर्मा, प्रवीन रोहेड़ा, अमित दुन्धरेहड़ी व रवि आदि उपस्थित रहे।

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