सोनीपत की सिद्धार्थ कॉलोनी के बहुचर्चित स्टाम्प ड्यूटी घोटाले की जांच सरकारी गलियों में फंस कर रह गई है। मामले में सीएम विंडो की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे है। दरअसल शिकायकर्ता ने जांच अधिकारी की शिकायत सीएम विंडो पर की थी। लेकिन जब उसका जवाब आया तो विभाग की चौकाने वाली कार्यवाही सामने आई।

हुआ यु की सीएम विंडो से मिले जवाब में अम्बाला के किसी मामले की रिपोर्ट भेज दी गई जबकि मामला सोनीपत से जुड़ा है। ऐसे में सीएम विंडो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है।

क्या है मामला

बता दें एडवोकेट मोहित खंडेलवाल को आरटीआइ से मिले दस्तावेज से सामने आया था कि सितंबर 2015 में सिद्धार्थ कॉलोनी में किला नंबर-26 के 7/1 में जो रजिस्ट्री की गई है उनमें स्टांप ड्यूटी चोरी की गई है। वर्ष 2015 में 3 सितंबर को हुई रजिस्ट्री संख्या 6039 में न तो कोई रजिस्ट्री फीस ली गई और न ही स्टांप ड्यूटी ली गई। ऐसा कर अधिकारियों ने सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाया है। जिसकी शिकायत उन्होंने विजिलेंस विभाग में की थी।

अब इन मामलों की जांच की फाइल जिला उपयुक्त के दफ्तर में अपने अंजाम तक पहुचने के इंतजार में है। मोहित खंडेलवाल ने बताया कि उन्होंने मामले से जुड़े दस्तावेज उपायुक्त कार्यालय में जमा करवा दिए गए। जिसके बाद डीआरओ को जांच सौपी गई थी।

बीती 12 जून को जांच पूरी करने के बाद जांच की फाइल जिलाध्यक्ष कार्यलय में पहुंच गई है लेकिन अभी तक इसपर आगे कोई कार्यवाही नहीं की गई है। याचिकाकर्ता ने जिलाध्यक्ष कार्यलय पर भी सवाल खड़े किए है। उनका कहना है की सभी जांच पूरी हो चुकी हैं। घोटाले के सबूत भी मिले है लेकिन फिर भी कार्यवही अमल में नहीं लाई जा रही।

वहीं याचिकाकर्ता ने भूमाफिया से अपनी जान का खतरा भी बताया है। जिसपर उन्होंने जिलाध्यक्ष को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात कही है। हैरानी की बात है की याची का संदेश पढ़ लेने के बाद भी कोई त्वरित कार्यवाही नहीं हुई है।

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