गुरुग्राम विशेष जांच दल (STF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रोहतक जिले के महम इलाके में एक बड़े वाहन चोरी गैंग का पर्दाफाश किया है। महम इलाके से वाहन चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गुरुग्राम एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 40 गाड़ियां भी बरामद हुई हैं।

गिरोह अबतक बनवा चुका है 562 फर्जी आरसी

एसटीएफ का मानना है कि अब तक ये गिरोह एसडीएम ऑफिस महम से 562 के करीब फर्जी ढंग से आरसी बनवा चुका है। मामले की ओर से महम पुलिस को महम के एसडीएम अभिषेक मीणा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। इसमें 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें महम एसडीएम ऑफिस के एमआरसी अनिल, कम्प्यूटर ऑपरेटर सैमाण निवासी कृष्ण व कांट्रेक्ट बेस पर कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर खरकड़ा का सोमबीर शामिल है।

जो अन्य 8 लोग हैं उनमें सैमाण का रमेश बामल, महम के वार्ड 5 का अमित, सीसर खास का रमेश, दादरी के घसोला का सोमबीर, दादरी का धर्मबीर, बालसंद का सूबे सिंह, सीसर खास का जसवंत उर्फ काला व दादरी का प्रवीन शामिल है। एसटीएफ के गुरुग्राम यूनिट इंचार्ज इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि एमआरसी अनिल, सोमबीर और कृष्ण को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों को कोर्ट में पेश कर 4 दिन के रिमांड पर लिया है।

इतना ही नहीं, महम एसडीएम (SDM) ऑफिस में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत भी इसमें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि एसडीएम ऑफिस में तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से यह गिरोह वाहन चोरी/लूट की वारदात को अंजाम देता था। गिरफ्तार आरोपितों में एसडीएम ऑफिस के कर्मचारी भी शामिल हैं।

वहीं गुरुग्राम एसटीएफ सोमवार दोपहर पत्रकार वार्ता कर कई और अहम खुलासा कर सकती है।

ऐसे चुराते थे वाहन

वाहन चोर होटलों, मॉल्स, शॉपिंग कांप्लेक्स, सरकारी दफ्तर, अस्पताल और बाजार जैसी सार्वजनिक जगहों में अपना शिकार खोजते हैं। वारदात को अंजाम देने से पहले रेकी करते हैं। एक बदमाश वाहन मालिक पर नजर रखता है तो दूसरा मास्टर चाभी से वाहन के लॉक को तोड़ने में लग जाता है। अगर इस बीच वाहन मालिक वापस आने लगता है तो उस पर नजर रखने वाला बदमाश तुरंत मोबाइल से अपने साथी को सूचित कर सावधान कर देता है। अगर वाहन मालिक दूर चला जाता है तो उसके वाहन का लॉक तोड़कर उसे चोरी कर लिया जाता है।

जिन वाहन की फर्जी आरसी बनाई उनकी फाइल ऑफिस से गायब

एसटीएफ ने मामले की जांच करते हुए सबसे पहले एसडीएम अभिषेक मीणा को इस बारे में अवगत कराया। उन्होंने प्रारंभिक स्तर पर अपने ऑफिस के कर्मियों की जांच कराई। एमआरसी अनिल, सोमबीर और कृष्ण की भूमिका सामने आई। फिर इनके कार्यकाल में बनी सभी आरसी की फाइलों की पड़ताल कराई। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने जितनी भी आरसी बनाई हैं उनके मैन्युअल रिकार्ड को इन्होंने खत्म कर दिया है। आरसी से संबंधित अधिकतर फाइलें जिनमें दस्तावेज लगे थे वो ऑफिस से गायब थी। इसके बाद एसडीएम ने केस दर्ज करा दिया।

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