पलवल. लॉकडाउन में सबसे अधिक मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ रही है। उनकी मजदूरी बंद हो गई और उनके सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया है। इन मजदूरों के सामने पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। पलवल में केएमपी एक्सप्रेस-वे के रास्ते पैदल अपने गंतव्य राजस्थान जा रहे मजदूरों में एक महिला ने सडक़ पर तपती धूप में बच्ची को जन्म दे दिया।

जन्म देने वाली महिला और उसके साथी मजदूर गांव रतीपुर के खेतों में तपती धूप में रह रहे थे। लेकिन तीन-चार दिन तक भी इन मजदूरों की किसी ने कोई सुध नहीं ली। किसी ने फोन के जरिए इसकी सूचना समाजसेवी संस्था रोटरी क्लब संस्कार पलवल को दी। रोटरी क्लब संस्कार पलवल व मीडिया की टीम मौके पर पहुंची और इन मजदूरों को मदद दी।

रोटरी क्लब संस्कार पलवल की चेयरपर्सन डॉ. अंजली जैन ने बताया कि जैसे ही उन्हें इन मजदूरों की सूचना मिली तो वे टीम के साथ मौके पर पहुंची। टीम की तरफ से नवजात बच्ची को कपड़े दिए गए और उनकी मां को जरुरी सामान दिया गया। बाकी मजदूरों को भी खाने-पीने का सामन दिया गया है। मामला मीडिया के सामने आते ही पुलिस प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और महिला व उसकी बच्ची को उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

महिला के साथ ही राजस्थान जा रही साथी महिला कमला ने बताया कि हम 10-12 दिन से पैदल चल रहे हैं। बीच रास्ते में हमे कोई मदद नहीं मिली। हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। कई दिनों से भूख के कारण हम बेहाल है।

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